मेरे मिलन
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दोस्तों से हर महीने मिलने का प्लान सच में कैसे बने

व्यस्त दिनचर्या के लिए छोटा और दोहराने लायक प्लान, ताकि दोस्ती एक और ज़िम्मेदारी न बन जाए।

मोहल्ले के कैफ़े में तीन दोस्त कॉफ़ी पीते हुए बातचीत कर रहे हैं।

अच्छी दोपहर बिताने के बाद «हमें अक्सर मिलना चाहिए» कहना आसान है। इस इच्छा को ठोस रूप दें: छोटा, कम खर्च वाला मिलना-जुलना, जो कम लोगों के आने पर भी हो सके।

सबसे आसान अच्छे विकल्प से शुरू करें

पूरे शनिवार के बजाय एक घंटा रखें। कॉफ़ी, सैर या किसी के घर चाय में कम तैयारी लगती है। आसानी से पहुँचने वाली जगह चुनें और पहुँच व सुविधा से जुड़ी ज़रूरतें पूछें। जहाँ संभव हो, पैसे खर्च करना वैकल्पिक रखें।

साफ़ प्रस्ताव भेजें

जैसे: «अगले महीने का पहला रविवार, 11 से 12, पार्क के प्रवेश पर। बारिश हुई तो मेरे घर चाय। गुरुवार तक बता देना।» तारीख, खत्म होने का समय और दूसरा विकल्प जवाब देना आसान बनाते हैं। शिफ़्ट में काम करने वालों के लिए दो तारीखें दें; हर बार वही समय ठीक होने का अनुमान न लगाएँ।

न आ पाने की गुंजाइश रखें

मिलकर तय करें कि दो या तीन लोग होने पर भी मिलेंगे या नहीं। एक महीना छूटने पर सफ़ाई या अपराधबोध ज़रूरी न हो। अगर बार-बार वही व्यक्ति नहीं आ पाता, तो उसे बाहर छोड़ने के बजाय समय बदलने पर बात करें।

छोटे काम बाँटें

एक व्यक्ति अगली तारीख सुझाए, दूसरा जगह या बारिश का विकल्प जाँचे। जाने से पहले तय करें कि अगला निमंत्रण कौन भेजेगा। दो-तीन मुलाकातों के बाद पूछें क्या आसान रहा और क्या बदलना चाहिए। यह सिलसिला दोस्ती के लिए हो, उल्टा नहीं।

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